मिडिल ईस्ट जंग की मार: मुंबई के 178 साल पुराने पंचम पुरीवाला में LPG खत्म, 79 डिश की जगह बचे सिर्फ 2 आइटम
मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध की आग अब दूर-दूर तक फैल रही है। इसकी लपटें मुंबई की उन गलियों तक भी पहुँच गई हैं जहाँ इतिहास आज भी ज़िंदा है। LPG गैस की तंगी ने अब सिर्फ घरों की रसोई नहीं, बल्कि दशकों पुरानी विरासत को भी हिला दिया है।
मुंबई का वो होटल जो इतिहास की निशानी है
छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बिल्कुल बाहर, फोर्ट इलाके की एक पुरानी गली में एक भोजनालय है जो पीढ़ियों से मुंबईकरों का पेट भरता आ रहा है। इस जगह का नाम है पंचम पुरीवाला। यह कोई आम होटल नहीं, बल्कि 178 साल पुरानी एक जीती-जागती धरोहर है।
आज यही होटल LPG संकट की चपेट में आकर मुश्किल दौर से गुज़र रहा है।
79 आइटम थे, अब सिर्फ 2 बचे हैं
पंचम पुरीवाला में कभी 79 तरह के खाने के आइटम मिला करते थे। पाँच अलग-अलग स्वाद और तरीकों से बनी पूरियाँ यहाँ की खास पहचान रही हैं। लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
गैस सिलेंडर की भारी कमी के कारण होटल में फिलहाल सिर्फ दो ही चीजें मिल रही हैं, पूरी-भाजी और आमरस-पूरी। बाकी सब बंद है।
होटल प्रबंधन के मुताबिक LPG का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। किसी तरह काम चालू रखने के लिए जान-पहचान वालों से उधार सिलेंडर लेकर रोज़ का काम निकाला जा रहा है। मेनू सिकुड़ने से रोज़ की आमदनी पर भी बड़ा असर पड़ा है।
1848 से शुरू हुई कहानी, रेलवे से भी पहले की है यह दुकान
यह होटल सन 1848 में खुला था, यानी भारत में रेलवे की शुरुआत से भी पहले। इसे पंचम दास ने स्थापित किया था। उस जमाने में यह जगह खासतौर पर मजदूर वर्ग के लिए सुबह के खाने का ठिकाना हुआ करती थी।
होटल के ठीक सामने ब्रिटिश काल में एक जेल हुआ करती थी, जिसकी वजह से यहाँ हमेशा काफी भीड़-भाड़ रहती थी। वक्त के साथ यह छोटी-सी दुकान अब एक दो मंजिला रेस्टोरेंट बन चुकी है।
खास बात यह है कि आज इस विरासत को मालिक की छठी पीढ़ी संभाल रही है। यह परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसी भोजनालय को जिंदा रखे हुए है।
पाँच पूरियाँ क्यों, इसके पीछे भी एक कहानी है
“पंचम” नाम संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ होता है पाँच। इसीलिए यहाँ की परंपरा रही है कि एक थाली में हमेशा पाँच पूरियाँ परोसी जाती हैं। यह सिर्फ खाने का तरीका नहीं, बल्कि इस होटल की पहचान है।
बाद के सालों में मेनू को और खास बनाने के लिए पाँच अलग-अलग स्वाद की पूरियाँ भी जोड़ी गईं, जो जल्द ही मुंबई के खाने-पीने के शौकीनों के बीच बेहद मशहूर हो गईं।
महात्मा गांधी से राजेश खन्ना तक, यहाँ सबने खाया
इस साधारण से भोजनालय की असाधारण बात यह है कि यहाँ कई बड़ी हस्तियाँ खाना खा चुकी हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम इनमें सबसे ऊपर है।
बॉलीवुड के महानायक राजेश खन्ना और मशहूर संगीत निर्देशक खय्याम भी इस भोजनालय के मेहमान रह चुके हैं। मुंबई के असली खाने को जो जानते हैं, उनके लिए पंचम पुरीवाला एक जानी-पहचानी जगह है।
यह सिर्फ एक होटल की तकलीफ नहीं है
पंचम पुरीवाला की यह हालत दरअसल एक बड़ी तस्वीर का छोटा-सा हिस्सा है। मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात और Strait of Hormuz पर बढ़ते खतरे की वजह से भारत में LPG Supply लगातार प्रभावित हो रही है।
होटल को उम्मीद है कि हालात जल्द सुधरेंगे और पूरा मेनू दोबारा शुरू हो सकेगा। लेकिन फिलहाल एक ऐतिहासिक विरासत किसी और देश की जंग की कीमत चुका रही है।














