आगरा से एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर पहले तो यकीन नहीं होता। लेकिन यह सच है और डॉक्टर खुद इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। शाहगंज इलाके के एक 38 साल के शादीशुदा युवक ने खुद ही अपने प्राइवेट पार्ट में पानी की एक लीटर की Plastic बोतल घुसेड़ ली। बोतल अंदर जाकर फँस गई और पूरे 36 घंटे तक बाहर नहीं निकली। जब दर्द की हद पार हो गई तब जाकर वह साकेत कॉलोनी के नवदीप Hospital पहुँचा।
Hospital पहुँचा तो हालत देख डॉक्टर भी सन्न
जब युवक Hospital पहुँचा तो उसकी तकलीफ साफ चेहरे पर दिख रही थी। ठीक से बैठना तक मुश्किल था। Hospital के Senior Surgeon डॉ. सुनील शर्मा ने तुरंत जाँच शुरू की। X-Ray की Report देखकर वहाँ मौजूद पूरी Medical Team एक पल के लिए रुक गई। पेट के अंदर साफ दिख रही थी एक पूरी Plastic बोतल।
इसके बाद Sigmoidoscopy जाँच हुई। इसमें पता चला कि बोतल के कारण अंदरूनी हिस्से में घाव भी हो गए हैं। इतने घंटों की वजह से सूजन और चोट दोनों हो चुकी थीं।
36 घंटे पहले की थी यह हरकत
पूछताछ में सामने आया कि यह सब 36 घंटे पहले हुआ था। इतने लंबे वक्त तक वह चुप रहा। न किसी को बताया, न मदद माँगी। शौच तक नहीं हो पा रहा था। दर्द हर घंटे बढ़ता जा रहा था। आखिर जब बर्दाश्त की हद टूट गई तब Hospital की राह ली।
एक नजर में पूरा मामला
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कहाँ की घटना | शाहगंज, आगरा, उत्तर प्रदेश |
| मरीज की उम्र | 38 साल, शादीशुदा |
| कितनी देर फँसी रही | करीब 36 घंटे |
| अस्पताल का नाम | नवदीप Hospital, साकेत कॉलोनी |
| ऑपरेशन करने वाले | डॉ. सुनील शर्मा |
| Surgery कितनी देर | करीब 70 मिनट |
| भर्ती रहे | 4 दिन |
| कब छुट्टी मिली | रविवार को |
70 मिनट तक चला ऑपरेशन
डॉ. सुनील शर्मा की अगुवाई में पूरी Medical Team ने Operation Theatre में काम शुरू किया। यह काम आसान नहीं था। अंदर इतना Damage हो चुका था कि जरा सी भी लापरवाही और नुकसान बढ़ सकता था।
पूरे सत्तर मिनट की सावधानी और मेहनत के बाद बोतल बाहर निकाली गई। ऑपरेशन सफल रहा और युवक की जान बच गई।
डॉक्टरों ने बताया आखिर ऐसा क्यों करते हैं कुछ लोग
डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि यह कोई जानबूझकर की गई शरारत नहीं थी। यह एक मानसिक बीमारी है जिसे Anal Erotism कहते हैं। इसमें कुछ लोगों को Anal Area में असामान्य तरह की उत्तेजना महसूस होती है और वे बाहरी चीजें इस्तेमाल करने लगते हैं। यह बात उनके परिवार को भी नहीं पता थी।
डॉक्टरों के मुताबिक यह युवक काफी समय से इस परेशानी से जूझ रहा था लेकिन शर्म की वजह से किसी से कुछ नहीं कहा।
चार दिन निगरानी में रखा, फिर छुट्टी
ऑपरेशन के बाद भी Doctors ने चैन की साँस नहीं ली। युवक को पूरे चार दिन Hospital में रखा गया। हर घंटे उसकी हालत पर नजर रखी गई। रविवार को जब सब कुछ Normal होने लगा तब घर जाने की इजाजत मिली।
डॉक्टरों की बात — शरीर ठीक हो गया, दिमाग का क्या?
डॉ. सुनील शर्मा ने एक जरूरी बात कही। उन्होंने कहा कि शरीर को ठीक करना हमारा काम था, वो हो गया। लेकिन जब तक मानसिक इलाज नहीं होगा यह दोबारा हो










