गंगा किनारे मिली 10 फीट लंबी डॉल्फिन, प्रदूषण बनी मौत का कारण
गंगा के किनारे 10 फीट लंबी और लगभग 350 किलोग्राम वजन की मृत डॉल्फिन मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस ने वन विभाग को सूचित किया। वन विभाग की टीम ने शव को कब्जे में ले लिया।
दुर्लभ डॉल्फिन का शव मिला
गंगा में डॉल्फिन दिखना अपने आप में दुर्लभ होता है। ऐसे में इतनी बड़ी डॉल्फिन का मृत शव मिलना चिंता का विषय बन गया। स्थानीय लोगों ने शव को देखकर वन्यजीव अधिकारियों को सूचना दी। डॉल्फिन का आकार और वजन देखकर सभी हैरान रह गए।
वन विभाग ने किया पोस्टमार्टम
वन विभाग की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया। चिड़ियाघर के पशु चिकित्सकों ने डॉल्फिन का पोस्टमार्टम किया। जांच में डॉल्फिन की अधिकतम उम्र 18 वर्ष बताई गई।
प्रदूषण को ठहराया जिम्मेदार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पोस्टमार्टम में प्रदूषण को मौत का मुख्य कारण बताया गया। गंगा के जल प्रदूषण ने इस दुर्लभ प्रजाति को प्रभावित किया। डॉल्फिन के शरीर में विषाक्त पदार्थ पाए गए। पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसे गंगा सफाई अभियान की असफलता का परिणाम बताया।
स्थानीय लोगों में चिंता
घटना के बाद इलाके में चिंता का माहौल है। गंगा में डॉल्फिन की संख्या पहले से कम हो चुकी है। स्थानीय मछुआरों ने बताया कि प्रदूषण के कारण जलीय जीवन खतरे में है। डॉल्फिन का मिलना गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
वन्यजीव विभाग की कार्रवाई
वन विभाग ने शव को डिस्पोज करने के बाद सैंपल लैब भेज दिए हैं। जल और ऊतक परीक्षण के नतीजे आने बाकी हैं। विभाग ने गंगा के अन्य इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी है।
पर्यावरणविदों की चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा में औद्योगिक कचरा और सीवेज प्रदूषण डॉल्फिन जैसे जलीय जीवों के लिए घातक साबित हो रहा है। डॉल्फिन राष्ट्रीय जलचर है। इसकी घटती संख्या चिंताजनक है।











