गर्दन में दर्द, तांत्रिक बुलाया और हो गया खौफनाक हादसा
उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के बरुआसागर क्षेत्र से अंधविश्वास से जुड़ी एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली 12 साल की बच्ची गले में दर्द और निगलने में परेशानी की शिकायत लेकर पहले इलाज के लिए डॉक्टर के पास गई, लेकिन जब आराम नहीं मिला तो परिवार ने गांव में मशहूर एक कथित तांत्रिक को घर बुला लिया।
इसी तांत्रिक ने इलाज के नाम पर बच्ची को बंद कमरे में लगभग आधे घंटे तक अपने साथ रखा और परिजनों के आरोप के मुताबिक इस दौरान उसने उसके कपड़े उतरवाकर पूरे शरीर पर नींबू रगड़ा और अमानवीय हरकतें कीं। यह पूरा मामला सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और पुलिस तक शिकायत पहुंची।
कई दिनों से गले में दर्द, घरवालों ने लिया तांत्रिक का सहारा
पीड़ित परिवार के मुताबिक बच्ची को कई दिनों से गले में तकलीफ थी और उसे खाना निगलने में दिक्कत हो रही थी। परिजन पहले उसे मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए ले गए, लेकिन जब दवाओं से खास फायदा महसूस नहीं हुआ तो गांव के कुछ लोगों ने सलाह दी कि यह साधारण बीमारी नहीं, “ऊपरी बाधा” या भूत-प्रेत का असर हो सकता है।
इसी सलाह के बाद परिवार ने मध्य प्रदेश के निवाड़ी निवासी और आसपास के गांवों में चर्चित तांत्रिक हरभजन को 18 नवंबर को झांसी के बरुआसागर स्थित अपने घर पर बुला लिया। तांत्रिक को पहले भी गांव में झाड़फूंक के लिए बुलाया जाता रहा था, इसलिए परिवार को उस पर भरोसा था और उन्होंने उसे बच्ची का इलाज करने की इजाजत दे दी।
“ऊपरी बाधा” का बहाना और बंद कमरे की शर्त
घर पहुंचते ही तांत्रिक ने बच्ची को देखकर दावा किया कि उस पर किसी तरह की “ऊपरी बाधा” है और इसका इलाज सिर्फ एकांत में, बंद कमरे में ही संभव है। उसने साफ शब्दों में माता-पिता को कहा कि बच्ची को कमरे के अंदर ले जाया जाएगा और किसी भी हालत में कोई अंदर नहीं आएगा।
परिवार के अनुसार, तांत्रिक ने यह तक कह दिया कि “इलाज के दौरान बच्ची रोएगी या चीखेगी भी, लेकिन पूजा-तंत्र क्रिया के बीच में कोई अंदर आया तो सब व्यर्थ हो जाएगा।” अंधविश्वास और डर के माहौल में डूबे परिजनों ने बिना शक किए उसकी सारी बातें मान लीं और बच्ची को उसके साथ कमरे में भेज दिया।
कपड़े उतरवाए, नींबू रगड़ा, बच्ची रोती रही
शिकायत में परिजनों ने आरोप लगाया है कि कमरे का दरवाजा बंद होते ही तांत्रिक ने बच्ची के कपड़े उतरवा दिए और पूरे शरीर पर नींबू रगड़ना शुरू कर दिया। इसी बहाने वह उसके साथ अभद्र और घृणित हरकतें करता रहा। मासूम लगातार रोती और चीखती रही, उसकी आवाज कमरे से बाहर तक सुनाई दे रही थी, लेकिन तांत्रिक की पहले से दी गई चेतावनी के कारण कोई भी अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
बताया गया कि यह सब करीब तीस से पैंतीस मिनट तक चलता रहा। बाहर खड़े परिजन बेचैन तो थे, लेकिन उन्हें यही लग रहा था कि झाड़फूंक की किसी कठिन प्रक्रिया के कारण बच्ची चिल्ला रही होगी और अगर वे बीच में गए तो “पूजा खंडित हो जाएगी” जैसा कि तांत्रिक ने पहले से डराया था।
“अब बच्ची ठीक हो जाएगी” कहकर तांत्रिक फरार
करीब आधे घंटे बाद जब तांत्रिक कमरे से बाहर निकला तो परिवार के मुताबिक उसके चेहरे पर मुस्कान थी और उसने दावा किया कि अब बच्ची पूरी तरह ठीक हो जाएगी। उसने इसे सफल तंत्र क्रिया बता कर वहां से निकलने की जल्दी दिखाई और कुछ ही देर में मौका देखकर घर से चला गया।
जैसे ही वह बाहर निकला, बच्ची डर के मारे कांपती हुई मां से लिपट गई और फफक-फफक कर रोने लगी। रोते-रोते उसने पूरा घटनाक्रम बताया कि कैसे कपड़े उतरवाकर उसके शरीर पर नींबू रगड़ा गया और उसके साथ गलत हरकतें की गईं। यह सुनते ही परिजनों के पैरों तले से जमीन खिसक गई, लेकिन जब तक वे कुछ कर पाते, आरोपी तांत्रिक वहां से फरार हो चुका था।
थाने पहुंचा मामला, तांत्रिक के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस
घटना सामने आते ही परिवार बच्ची को साथ लेकर बरुआसागर थाने पहुंचा और पूरी कहानी थानाध्यक्ष को बताई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्ची की मां ने आरोपी हरभजन के खिलाफ लिखित तहरीर दी, जिसके आधार पर पुलिस ने उसके खिलाफ बलात्कार से जुड़ी धाराओं, पॉक्सो एक्ट और अन्य गंभीर प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
थाना प्रभारी और स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है और उसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं। आसपास के इलाकों और पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में भी उसकी लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द उसे गिरफ्तार कर कानून के हवाले किया जा सके।
अंधविश्वास की काली सच्चाई, मासूमों पर भारी
यह पूरा मामला एक बार फिर दिखाता है कि कैसे अंधविश्वास और झाड़फूंक के नाम पर बच्चों और महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा झेलना पड़ता है। डॉक्टर के इलाज से जब तुरंत फायदा नहीं दिखता, तो कई ग्रामीण परिवार ओझा-तांत्रिकों के चक्कर में फंस जाते हैं और वही लोग इस भरोसे का गलत फायदा उठाकर हैवानियत तक उतर आते हैं।
गले के दर्द जैसी सामान्य दिखने वाली समस्या के लिए भी जब “ऊपरी बाधा” और “भूत-प्रेत” जैसे शब्द इस्तेमाल होते हैं, तो बीमारी की सही जांच और वैज्ञानिक इलाज पीछे छूट जाते हैं। इस बीच तंत्र-मंत्र के नाम पर जो कुछ बंद कमरों में होता है, उसका शिकार अक्सर वही लोग बनते हैं जो खुद अपना बचाव करने की स्थिति में नहीं होते।
पुलिस और सामाजिक संगठनों की अपील
मामला सामने आने के बाद न सिर्फ पुलिस बल्कि कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। लोगों से अपील की जा रही है कि किसी भी बीमारी के लिए सबसे पहले योग्य डॉक्टर के पास जाएं, न कि किसी स्वयंभू तांत्रिक या ओझा के पास जो बिना जांच किए “भूत-प्रेत” का ठप्पा लगा दे।
साथ ही, बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी जागरूक रहने की जरूरत बताई जा रही है। किसी भी परिस्थिति में किसी अजनबी या कम भरोसेमंद व्यक्ति के साथ बच्चे को अकेला बंद कमरे में न छोड़ा जाए, चाहे वह कितनी ही “धार्मिक क्रिया” या “इलाज” की बात क्यों न करे। यह basic सावधानी कई बड़े हादसों को होने से रोक सकती है।
ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की सख्त जरूरत
झांसी का यह मामला कोई पहला मामला नहीं है जहां झाड़फूंक के नाम पर इस तरह की शर्मनाक हरकत सामने आई हो। देश के कई हिस्सों से समय-समय पर ऐसी खबरें आती रही हैं, जो बताती हैं कि ग्रामीण इलाकों में आज भी अंधविश्वास की जड़ें काफी गहरी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ पुलिस कार्रवाई ही काफी नहीं, बल्कि हेल्थ सर्विसेज, शिक्षा और जागरूकता अभियान के जरिए लोगों को यह समझाना जरूरी है कि बीमारी का इलाज वैज्ञानिक तरीके से ही संभव है। साथ ही, बच्चों को भी यह सिखाना जरूरी है कि अगर कोई भी व्यक्ति उनकी इच्छा के खिलाफ उनके शरीर को छूने की कोशिश करे तो तुरंत शोर मचाकर या भरोसेमंद बड़े को बताकर मदद मांगें।
निष्कर्ष: भरोसा किस पर और कितना?
बरुआसागर की यह घटना एक दर्दनाक reminder है कि गलत जगह किया गया भरोसा कितनी बड़ी ट्रैजेडी में बदल सकता है। परिवार ने सोचा कि तांत्रिक बच्ची का गले का दर्द दूर कर देगा, लेकिन आरोप है कि उसी ने उनकी मासूम बेटी के साथ घृणित हरकत कर दी।
अब पूरा मामला पुलिस और अदालत के दायरे में है, लेकिन समाज के लिए सीख यही है कि इलाज, पूजा या तंत्र-मंत्र के नाम पर किसी को भी इतना अधिकार न दे दिया जाए कि वह बंद कमरे में बच्चों या महिलाओं के साथ मनमानी कर सके। जागरूकता, विज्ञान पर भरोसा और कानून पर विश्वास ही ऐसे अंधविश्वासों की जड़ काटने का सबसे मजबूत तरीका माना जा रहा है।













