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Ganesh Chaturthi 2025: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और गणेश चालीसा हिंदी में Lyrics

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On: August 19, 2025 2:50 PM
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गणेश चतुर्थी 2025 पूजा विधि और गणेश चालीसा गाइड

गणेश चतुर्थी 2025 का पर्व भगवान गणेश की पूजा, भक्ति और मनोबल की नई ऊर्जा लेकर आता है। इस पावन अवसर पर शुभ मुहूर्त में पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस आर्टिकल में हम आपको गणेश चतुर्थी 2025 का शुभ मुहूर्त, सरल पूजा विधि और हिंदी में गणेश चालीसा पढ़ने का तरीका बताएंगे।

गणेश चतुर्थी 2025 की शुभ तिथि और मुहूर्त

2025 में गणेश चतुर्थी की तिथि 27 अगस्त को है। पूजा के लिए सबसे उत्तम समय या muhurat मध्याह्न काल है जो लगभग 11:05 AM से 1:40 PM तक रहेगा। यह समय पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है ताकि सभी कार्य सफलता पूर्वक संपन्न हों।

गणेश चतुर्थी पूजा विधि

पूजा से पहले स्वच्छता रखें और स्नानादि कर लें। घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ़ कर, हल्का स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा के लिए निम्न सामग्रियां तैयार रखें:

  • गणेश जी की प्रतिमा
  • दीपक और अगरबत्ती
  • फूल-माला और दुर्वा
  • पिंडी, अक्षत (चावल)
  • नैवेद्य (मोडक, लड्डू, फल)
  • जल, पंचामृत
  • आरती थाली, घंटी

पूजा प्रारंभ करें गणपति मंत्र का जाप और आरती से। पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजा करें। अंत में गणपति बप्पा के चरणों में प्रसाद अर्पित करें।

हिंदी में गणेश चालीसा

श्री गणेश चालीसा | Ganesh Chalisa Lyrics in Hindi

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दोहा
जय गणपति सद्‌गुन सदन, करिवर बदन कृपाल ।
विघ्नहरण मंगल-करण, जय जय गिरिजालाल ॥

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जय जय जय गणपति गणराजू ।
मंगल भवन करण शुभ काजू ॥
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जय गजबदन सदन सुखदाता ।
विश्व विनायक बुद्धि विधाता ॥
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वक्रतुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन ।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मनभावन ॥
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राजत मणि-मुक्तन उर माला ।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥
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पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं ।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥
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सुन्दर पीताम्बर तन साजित ।
चरणपादुका मुनि मन राजित ॥
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धनि शिव सुवन ऋद्धि सिद्धि तव कहौं जन्म शुभ षडाननभ्राता ।
गौरी ललन विश्व विख्याता ॥
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चॅवर सुधारे । मूषक वाहन सोहत द्वारे ॥ कथा तुम्हारी ।
अति शुचि पावन मंगलकारी ॥
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कहीँ जन्म शुभ कथा तुम्हारी ।
अति शुचि पावन मगलकारा ॥
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एक समय गिरिराज कुमारी ।
पुत्र हेतु तप कीन्हीं भारी ॥
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भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा ।
तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा ॥
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अतिथि जानि भे गौरि सुखारी ।
बहु विधि सेवा करी तुम्हारी ॥
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अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा ।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥
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मिलहिं पुत्र तुहि बुद्धि विशाला ।
बिना गर्भ धारण यहि काला ॥
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गणनायक गुण ज्ञान निधाना ।
पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥
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अस कहि अन्तर्धान रूप है ।
पलना पर बालक स्वरूप है ॥
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बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना ।
लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना ॥
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सकल मगन सुख मंगल गावहिं ।
नभ ते सुरन सुमन बर्षावहिं ॥
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शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं ।
सुर-मुनिजन सुत देखन आवहिं ॥
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लखि अति आनन्द मंगल साजा ।
देखन भी आए शनि राजा ॥
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निज अवगुण गनि शनि मन माहीं ।
बालक देखन चाहत नाहीं ॥
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गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो ।
उत्सव मोर न शनि तुहि भायो ॥
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कहन लगे शनि, मन सकुचाई ।
का करिहौं, शिशु मोहि दिखाई ॥
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नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ ।
शनि सों बालक देखन कहेऊ ॥
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पड़तहिं शनि दृगकोण प्रकाशा ।
बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥
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गिरिजा गिरीं विकल है धरणी ।
सो दुख दशा जाइ नहिं वरणी ॥
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हाहाकार मच्यो कैलाशा ।
शनि कीन्हों लखि सुत का नाशा ॥
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तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाये ।
काटि चक्र सों गजशिर लाये ॥
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बालक के धड़ ऊपर धार्यो ।
प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डार्यो ।
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नाम ‘गणेश’ शम्भु तब कीन्हें ।
प्रथम पूज्य बुद्धिनिधि, वर दीन्हें ॥
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बुद्धि परीक्षा जब शिव लीन्ही ।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा चले षडानन भरमि भुलाई ।
रचे बैठि तुम बुद्धि चरण मात् पित् के धर लीन्हें । तिनके सात प्रदक्षिण कीन्ही ॥ उपाई ॥ कीन्हें ॥
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धनि गणेश कहि शिव हिय हों । नभ ते सुरन सुमन बहु बर्थ्यो ॥
तुम्हारी महिमा बुद्धि बड़ाई । शेष सहस मुख सके न गाई ॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी । करहुँ कौन विधि विनय तुम्हारी ॥
भजत ‘राम सुन्दर’ प्रभुदासा । लग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥
अब प्रभु दया दीन पर कीजै। अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै ॥
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दोहा
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै धर ध्यान ।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सनमान ॥
सम्बत अपना सहस दश, ऋषि पंचमी दिनेश ।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश ॥

गणेश चालीसा भगवान गणेश की महिमा का सुंदर स्तोत्र है जो हिंदी में सरल भाषा में अनुपम भक्ति भाव व्यक्त करता है। नियमित पाठ से मन की सभी वासनाएं शांत हो जाती हैं और बुद्धि में तेज़ आता है। नीचे गणेश चालीसा का पहला श्लोक दिया गया है:

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

पूरे चालीसा की प्रतिलिपि आप पूजा के दौरान पढ़ सकते हैं या यहां से डाउनलोड कर सकते हैं।

पूजा के समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • पूजा करते समय पूर्ण एकाग्रता और श्रद्धा होनी चाहिए।
  • झूठे वादे या किसी पर दबाव डालने से बचें।
  • एक दूसरे की धार्मिक भावना का सम्मान करें।
  • संयुक्त पूजा में सभी का सहयोग सराहनीय होता है।

निष्कर्ष

गणेश चतुर्थी 2025 का यह त्योहार आपके जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाए। शुभ मुहूर्त में पूजा करने और गणेश चालीसा का पाठ करने से आपका मनोबल प्रबल होगा और सभी बाधाएं दूर होंगी।

और त्योहारी जानकारियों और गाइड्स के लिए देखें: /category/festivals/

मुहूर्त और पंचांग जानने के लिए भरोसेमंद स्रोत देखें: DrikPanchang

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